राजस्थान उच्च न्यायालय ने एसआई भर्ती परीक्षा- 2021 को रद्द करने का ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में सर्वोच्च न्यायालय के बैशाखी भट्टाचार्य मामले का हवाला देते हुए यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया। इसी साल 3 अप्रैल को सर्वोच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग की 2016 की शिक्षक भर्ती की सुनवाई करते हुए परीक्षा रद्द कर दी थी। पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग ने 2016 में राज्य स्तरीय भर्ती परीक्षा आयोजित की थी। यह भर्ती परीक्षा 25 हज़ार से ज़्यादा शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक पदों के लिए आयोजित की गई थी। इस भर्ती में 23 लाख से ज़्यादा उम्मीदवारों ने भाग लिया था और 25 हज़ार 753 लोगों को नियुक्ति पत्र दिए गए थे।
सीबीआई ने की थी बंगाल भर्ती घोटाले की जाँच
इस भर्ती प्रक्रिया में ओएमआर शीट से छेड़छाड़ की शिकायत सामने आई थी। सीबीआई ने इसकी जाँच की थी। सीबीआई जाँच में पता चला कि ओएमआर शीट से छेड़छाड़ के कारण 6 हज़ार 276 उम्मीदवारों का परिणाम प्रभावित हुआ था। सीबीआई जाँच में कई नियुक्त उम्मीदवारों की खाली ओएमआर शीट भी सामने आई थीं।
सुप्रीम कोर्ट की वो टिप्पणियाँ, जो बनीं आधार
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था, "अगर जाँच से पता चलता है कि भर्ती प्रक्रिया में धोखाधड़ी हुई है, तो पूरी परीक्षा रद्द की जा सकती है।"
किसी भी चयन प्रक्रिया को रद्द करने का फैसला निष्पक्ष और गहन जाँच के ज़रिए जुटाए गए सबूतों के आधार पर ही लिया जाना चाहिए। लेकिन भर्ती प्रक्रिया में धोखाधड़ी और धांधली को संदेह से परे साबित करने की ज़रूरत नहीं है, जैसा कि आपराधिक मामलों में होता है। इसके बजाय, संभाव्यता परीक्षण पर आधारित सबूतों के आधार पर धोखाधड़ी का आकलन ही पर्याप्त है।
अगर भर्ती प्रक्रिया में गंभीर हेराफेरी और धोखाधड़ी साबित होती है, तो प्रक्रिया की शुद्धता को निर्दोष उम्मीदवारों की सुविधा से ऊपर रखा जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि अगर यह साबित हो जाता है कि पूरी प्रक्रिया भ्रष्ट है, तो व्यक्तिगत रूप से सुनवाई ज़रूरी नहीं है।
बेदाग उम्मीदवारों के साथ हमारी सहानुभूति - राजस्थान हाईकोर्ट
सुप्रीम कोर्ट की इन्हीं टिप्पणियों को आधार मानते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने भी कल (28 अगस्त) अपना फैसला सुनाया। हाईकोर्ट ने भी अपनी टिप्पणी में यही कहा कि बेदाग उम्मीदवारों के साथ हमारी सहानुभूति है, लेकिन भर्ती में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी हुई है। अभ्यर्थियों को आयु में छूट तथा अपनी पुरानी नौकरी पर लौटने का विकल्प दिया गया है।